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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (15 अगस्त) को कहा कि भारत समुद्र,सीमा, साइबर दुनिया या अंतरिक्ष से आने वाली सभी शत्रु ताकतों को हराने में सक्षम है. अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में मोदी ने कहा कि देश की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है. मोदी ने कहा, "देश की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. आतंरिक सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. चाहे यह हमारा समुद्र हो या सीमा, साइबर दुनिया या अंतरिक्ष सभी तरह की सुरक्षा करने में व शत्रु ताकतों को हराने में भारत सक्षम है."मोदी की यह टिप्पणी भारत और चीन के बलों के बीच सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम में जारी गतिरोध को लेकर आई है. यह गतिरोध भारत-चीन-भूटान के बीच तिराहे को लेकर है, जिससे दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है. हालांकि मोदी ने पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद का कोई उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अकेला नहीं है, इस जंग में कई देशों की सक्रिय भागीदारी है, जो हमारे साथ खुफिया जानकारियां साझा करते हैं.मोदी ने कहा, "हम कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं. मैं उन्हें तह-ए-दिल से धन्यवाद देता हूं. विश्व में भारत का कद बढ़ रहा है." मोदी ने सुरक्षाबलों का आभार जताते हुए कहा, "हमारी सेना कभी पीछे नहीं हटी. चाहे चरमपंथ, आतंकवाद, घुसपैठ या सुरक्षा संबंधित बाधाएं हों."
मोदी ने यह भी कहा कि बीते साल सितंबर में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के लॉचिंग पैड पर सर्जिकल स्ट्रॉइक ने दुनिया के सामने भारत की ताकत को सिद्ध किया. मोदी ने कहा, "हमारे बलों ने वामपंथी अतिवाद, आतंकवाद, घुसपैठ व शांति भंग करने वाले तत्वों से लड़ने में बलिदान के शिखर को छुआ है. दुनिया ने भारत की ताकत व सर्जिकल स्ट्रॉइक को मान्यता दी है." उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने वन रैंक वन पेंशन का क्रियान्वयन किया है और सशस्त्र बलों के जोश को बढ़ाया है.अशांति के दौर से गुजर रहे कश्मीर के लोगों को लक्षित कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (15 अगस्त) को कहा कि गोलियों या गालियों से कश्मीर मुद्दे का हल नहीं हो सकता और प्रत्येक कश्मीरी को गले लगाकर ही इसका समाधान किया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने 71वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को अपने करीब 56 मिनट के संबोधन में इस बात पर बल दिया कि सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता है. उन्होंने जातिवाद एवं सांप्रदायिकता को खारिज करते हुए कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने चौथी बार लालकिले से अपने संबोधन में कश्मीर के लोगों को गले लगाने का आह्वान करते हुए कहा, ‘न गाली से, न गोली से, परिवर्तन होगा गले लगाने से.... समस्या सुलझेगी, हर कश्मीरी को गले लगाने से.’ मोदी ने कहा कि चंद अलगाववादी राज्य में समस्याएं पैदा करने के लिए विभिन्न चालें चलते हैं. किन्तु सरकार कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाने के लिए प्रतिबद्ध है

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